पूर्वी गोदावरी आंध्र प्रदेश में स्थित एक प्रमुख जिला है। यह विशाखापतनम, पश्चिम गोदावरी, याम्मम जिले और बंगाल की खाड़ी से घिरा हुआ है जहां भारी मात्रा में प्राकृतिक गैस मिली है। यहां के हरे भ्ारे खेतों में धान की बड़ी अच्छी फसल होती है। यह सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध जिला है। पूर्वी गोदावरी का मुख्याल य काकीनाडा है जो अपनी मिठाइयों के लिए जाना जाता है। जैसा कि नाम से विदित है, यह गोदावरी नदी के लिए जाना जाता है। देखने के लायक स्थान मंदिर - आंध्र प्रदेश के उततरी तटीय भाग में स्िथत इस जिले में मंदिरों की भारी भरकम संख्या है। ये मंदिर अपने आप में संपूर्ण ओर समग्रता लिए हुए हैं। साथ ही य हां ऐतिहासिक और नैसर्गिक पर्यटन स्थल भी हैं। आप फोटोगैलरी देखकर यहां के मंदिरों के बारे में अपना अनुमान खुद ही लगा सकते हैं। इन मंदिरों में ऐनावाली, अन्नावरम, अन्थारवेदी, अप्पनापलली, बिकाबोलु, जीमामीडाडा, उालेश्वरम, कोरूकोंडा, काटिपलली, मंडापल्ली, मसाला टिप्पा, मारामलला, पालीवेला, पिथापुरम, राजमुंदरी, रायाली, समालकोटा, सर्पावरम, टुनी और वानापल्ली शामिल हैं। राजमुंदरी - यह पूर्व गोदावरी जिले में गोदावरी नदी के बायें किनारे स्थित है। इसका पुरातन इतिहास है और कहा जाता है कि पूर्वी चालुक्य शासक राजराजा नरेंद्र ने 1022 ई में इसका निर्माण करवाया था। इस शहर 11 वीं शताब्दी के.कुछ सुन्दर महल, किले की प्राचीरें आदि हैं। रियाली - रियाली राजमण्ड्री से 25 किमी की दूर स्थित है। यह जगमोहिनी-केशवस्वामी के मन्दिर के लिए प्रसिद्ध है। देवताओं की मूर्ति काले पत्थर से गढ़ी गई है और अपनी खूबसूरती और भव्य मूर्ति-शिप्लकला के सौंदर्य के कारण दर्शनीय है। द्राक्षारामम- यहां दो भागों में बंटे शिलिंग की पूजा होती हे। शिवलिंग के दो हिस्सों में पूजा होने के पीछे एक बहुत ही बड़ी पौराणिक कहानी है। लेकिन वो कहानी है क्या। क्योंकि उस कहानी का तार भी जुड़ा शिव और शक्ति के उसी स्वरुप से जो इस जगत का आधार है। दो हिस्सों में बांटने का मतलब ये नहीं है कि ये लिंग दो टुकड़ों में है। दरअसल, है ये एक ही टुकड़े में लेकिन इसकी पूजा होती है दो जगहों से। क्योंकि एक जगह से इसकी पूजा संभव भी नहीं है। दरअसल, हुआ यूं कि जबतक देवगण इस लिंग की बृद्धि को रोकने के लिए कोई पूजा अर्चना शुरु करते, ये महाशिवलिंग बढ़ता रहा। जबतक पूजा अर्चना खत्म होती तबतक इस लिंग की लंबाई 15 फूट हो चुकी थी। और इसीलिए इस लिंग को दो हिस्सों में बांट दिया गया। शिवलिंग की पूजा उसके उपरी भाग से होती है। कोई भी इंसान पंद्रह फुट लंबा नहीं हो सकता। जाहिर है वो शिवलिंग के शिर्ष पर जल नहीं डाल सकता। इसलिए इस लिंग को दो भागों में बांट दिया गया और पहली पूजा पहली मंजिल से होती है और वहां से पूजा करने के बाद श्रद्धालु नीचे आते हैं। इस तरह दो हिस्सों में इस महाशिवलिंग की पूजा समाप्त होती है। द्राक्षारामा का यह मंदिर आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद से 466 किलोमीटर की दूरी पर है। अगर आप इस जगह पर हैदराबाद से बस से जाते हैं तो आपको आठ घंटे का सफर तय करना पड़ेगा। राजमुंदरी इस जगह पर पहुंचने वाला सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। राजमुंदरी से महाशिवलिंग का ये पवित्र स्थान महज 25 किलोमीटर की दूरी पर है। कैसे पहुंचे - पूर्वी गोदावरी पहुंचने के लिए आप सड़क और रेल दोनों ही मार्गों का चयन कर सकते हैं। राजमुंदरी में एयरपोर्ट है जहां नियमित रूप से डड़ानें आती जाती हैं। काकीनाडा और राजमुंदरी दोन ों ही जगह रेलवे स्टेशन है जो देश के बाकी रेल नेटव र्क से जुड़ा हुआ है। साथ ही सड़क मार्ग से आप आसानी से बसों या अपनी सवारी से वहां पहुंचा जा सकता है।