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ओंकारेश्‍वर

मध्‍य प्रदेश का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्‍थल

नर्मदा और कावेरी का संगम स्‍थल ओंकारेश्‍वर मध्‍य प्रदेश का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्‍थल है। यह मुख्‍य रुप हिन्‍दू तीर्थस्‍थल के रुप में प्रसिद्ध है। वैसे यहां सभी धर्म के लोग आते हैं। ओंकारेश्‍वर में एक प्रसिद्ध शिवलिंग है। इस शिवलिंग को देश के बारह पवित्र ज्‍योतिर्लिगों में से एक माना जाता है। यह शिवलिंग ओंकार मांधाता मंदिर में स्‍थापित है। यहां आने वाले श्रद्धालु नर्मदा और कावेरी के संगम में स्‍नान करने के बाद पवित्र ज्‍योतिर्लिंग का दर्शन करते हैं। 

प्रमुख दर्शनीय स्‍थल

ओकार मांधाता मंदिर - यह ओंकारेश्‍वर का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। इसी मंदिर में पवित्र ज्‍योतिर्लिंग स्‍थापित है। यह मंदिर एक मील लंबे और आधा मील चौड़े द्वीप पर स्‍थापित है। यह द्वीप नर्मदा नदी के कटाव से निर्मित हुआ है। यह मंदिर पत्‍थर का बना हुआ है। मंदिर में बारीक नक्‍काशी की गई है। विशेष रुप से इसके ऊपरी भाग में की गई नक्‍काशी देखने लायक है। इसका छत भी देखने लायक है। मंदिर के स्‍तंभों पर वृत्त, वर्ग तथा बहुकोणीय आकृतियां बनाकर इसकी सजावट की गई है।

सिद्धनाथ मंदिर - ओंकारेश्‍वर में ओकार मांधाता मंदिर के अलावा भी कई अन्‍य मंदिर है। इन्‍हीं मंदिरों में एक सिद्धनाथ मंदिर भी है। यह मंदिर मध्‍यकाल की ब्राह्मण कला का बेहतरीन उदाहरण है। विशेष रुप से मंदिर की बाहरी दीवारों पर नक्‍काशी कर बनाए गए हाथी की आकृति अदभूत है।

चौबीस अवतार - यह एक मंदिर समूह है। यहां मुख्‍य रुप से हिन्‍दु और जैन मंदिर हैं। प्रत्‍येक मंदिर स्‍थापत्‍य कला का उत्‍कृष्‍ट नमूना है।

सातमातृका मंदिर - यह भी एक मंदिर समूह है। यह मंदिर समूह ओंकारेश्‍वर से छ: किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां स्थित मंदिरों का निर्माण 10वीं शताब्‍दी में हुआ था।

काजल रानी की गुफा - यह गुफा ओंकारेश्‍वर से नौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गुफा जिस स्‍थान पर है, वह स्‍थान प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है।

कैसे जाएं
हवाई मार्ग: यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा इंदौर शहर में है। ओंकारेश्‍वर इंदौर से 77 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। इंदौर का हवाई अड्डा देश के प्रमुख शहरों से वायु मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग: यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्‍टेशन शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह रेलवे स्‍टेशन पश्‍िचमी रेलवे के रतलाम-खंडवा सेक्‍शन से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग: ओंकारेश्‍वर इंदौर, उज्‍जैन तथा खंडवा से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।

कब जाएं: यहां जाने का सबसे उचित समय अक्‍टूबर से नवंबर के बीच का है। वैसे यहां अक्‍टूबर से मार्च तक जाया जा सकता है।