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गोण्डा

रामचरित्र मानस के रचनाकार तुलसीदास की जन्मभूमि

प्रसिद्ध महाकाव्य रामचरित्र मानस के रचनाकार तुलसीदास की जन्मभूमि गोण्डा उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है। स्वामी नारायण छापिया, पासका, वाराही देव, पृथ्वी नाथ महादेव, देवी पतन सिद्ध पीठ, तिरर मनोरमा और प्राश आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से है। यह जिला बलरामपुर जिले के उत्तर, बहराइच और श्रावस्ती जिले के पश्चिम, बस्ती जिले के पूर्व और बारा-बंकी जिले एवं फैजाबाद जिले के दक्षिण से घिरा हुआ है। कहा जाता है कि कल्हण शासन के दौरान यहां के राजा खोरासा थे। उस समय यह जगह मवेशी स्थल के रूप में उपयोग की जाती थी। इस जगह की स्थापना राजा मान सिंह द्वारा की गई थी। राजा दत्त सिंह के शासन के दौरान कई राजपूत गोण्डा आकर बस गए थे। इस जगह पर दत्त सिंह ने जहां एक विशाल महल का निर्माण करवाया था। वहीं राजा दत्त सिंह के पौते शियो प्रसाद सिंह ने झील के आकार में सागर तालाब और द्वीप के मध्य एक मंदिर का निर्माण करवाया था।

क्‍या देखें
स्वामी नारायण छापिया
: यह जगह जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान संत सहजानन्द का जन्म स्थान है। इनका जन्म 1780 ई. में हुआ था। बहुत ही कम उम्र में वह काफी प्रसिद्ध हो गए थे और गुजरात जाकर बस गए थे। जूनागढ़ स्थित वैष्णव मठ ने प्रमुख रामानन्द ने उन्हें गोद ले लिया था। सहजानन्द की मृत्यु केवल 49 वर्ष की आयु में ही हो गई थी। उनकी मृत्यु के पश्चात, उनके सम्मान में उनके भक्तों ने स्वामी नारायण मंदिर का निर्माण करवाया था। कार्तिक माह के अन्त और रामनवमी के अवसर पर काफी संख्या में भक्त यहां आते हैं। स्वतंत्रता संग्राम के समय में भी इस जगह का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।

पासका: जिला मुख्यालय के दक्षिण-पश्चिम से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पासका सरयू नदी के तट पर स्थित है। यह काफी प्राचीन संगम स्नान स्थल है। पशु योनि से मुक्ति पाने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी में स्नान करने के लिए आते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान वराह ने इस जगह पर अवतार लिया था। कहा जाता है कि यहां स्थित भगवान वराह के प्राचीन मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में करवाया गया था। मंदिर में स्थित मूर्ति कुछ वर्ष ही पुरानी है। इसके अतिरिक्त यहां कई छोटे-छोटे मंदिर और काचा घाट भी स्थित है। पासका को प्रसिद्ध साहित्यकार गोस्वामी तुलसीदास और उनके गुरू की भूमि के रूप में जाना जाता रहा है। इस जगह को गुरू नरहरिदास के स्थान के रूप में जाना जाता है। इस जगह की दक्षिण दिशा की ओर एक संत की कुटिया स्थित है। उस जगह पर तुलसीदास राम कथा सुनाया करते थे।

वाराही देव: पासका के पूर्व से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर वाराही देव स्थित है। वाराही देव को उत्तरी भवानी के नाम से भी जाना जाता है। भगवती के इस प्राचीन मंदिर में काफी संख्या में भक्त यहां आते हैं, विशेष रूप से नवरात्रों के अवसर पर। यह जगह सुकर झट के एक हिस्से के रूप में जानी जाती है। माना जाता है कि मंदिर स्थित आदी शक्ति वाराही की प्रतिमा का सम्बन्ध पासका के वारहा की शक्ति से है।

पृथ्वी नाथ महादेव: खड़गपुर के दक्षिण से कुछ दूरी पर भगवान शिव का प्राचीन मंदिर स्थित है। इस जगह का सम्बन्ध महाभारत काल से है। जिस वजह से इस क्षेत्र को पंचारायन के नाम से जाना जाता है। वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण अयोध्या के महाराजा मान सिंह ने करवाया था। माना जाता है कि जिस जगह पर इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था, प्राचीन समय में उस स्थान पर एक विशाल शिवलिंग प्राप्त हुई थी। इसके अतिरिक्त, मंदिर से कुछ ही दूरी पर पचरान नाथ का अन्य मंदिर स्थित है।

देवी पतन सिद्ध पीठ: गोण्डा से 70 किलोमीटर और तुलसीपुर से सिर्फ दो किलोमीटर की दूरी पर देवी पतन सिद्ध पीठ स्थित है। इस पीठ की स्थापना नाथ सम्प्रदाय के गुरू गोरखनाथ ने की थी। माना जाता है कि जिस जगह पर यह मंदिर स्थित है उसका निर्माण राजा विक्रमादित्य ने करवाया था। यह प्रसिद्ध स्थल 51 शक्तिपीठों में से एक है। नवरात्रों के दौरान मंदिर में बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। प्रत्येक वर्ष शव पंचमी के अवसर पर भगवान पीर रतन नाथ को नेपाल के डंग से देवी पतन मंदिर लाया जाता है। जिसके पश्चात् भगवान पीर रतन नाथ और देवी पतन सिद्ध की पूजा की जाती है।

तिरर मनोरमा: गोण्डा शहर के उत्तर से 21 किलोमीटर की दूरी पर यह पवित्र स्थान स्थित है। माना जाता है कि यहां पर मुनि उद्दालक का आश्रम स्थित है। इसके अलावा यही से मनोरमा नदी की उत्पत्ति हुई थी। साथ ही यहां पक्का घाट के साथ प्राचीन सरोवर और मंदिर स्थित है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है।

प्राश: यह जगह सरयू नदी के उत्तर और तहसील तराबगंज में स्थित है। इस जगह का सम्बन्ध बशीशथा के पौते और शक्ति के पुत्र, प्राचीन संत पराशर से है। कहा जाता है कि इनकी माता का नाम अदृश्यवन्ती था। ऋषि पराशर को प्रसिद्ध समर्थन के सृष्टिकर्ता के रूप में भी जाना जाता है। उन्ही की याद में यहां पाश का निर्माण करवाया गया है।

कहां ठहरें: गोण्‍डा में ठहरने के लिए होटलों का अभाव है। इसलिए यहां आने वाले पर्यटक इसके नजदीकी शहर श्रावस्‍ती में ठहरते हैं।

लोटस निक्को होटल
लोकेशन
- बलरामपुर, बहराइच हाइवे
दूरभाष- 05252 - 265291 / 92
फैक्स- 05252 - 265293
ईमेल- lotus.nikko.hotels@vsnl.net
वेबसाइटwww.lotusnikkohotels.com
कमरों की संख्या- 58
सुविधाएं- रेस्टोरेंट, रूम सर्विस, गर्म पानी, मुद्रा विनिमय, इंटरनेट, ट्रैवल असिसटेंट, आदि।

हेरिटेज होटल महामाया
लोकेशन
- बलरामपुर
दूरभाष- 05263 - 232507, 232208, 9415407259, 9451727107
फैक्स- 05263 - 232508
ईमेल- balrampurhotels@bol.net.in
कमरों की संख्या- 20
सुविधाएं- रेस्टोरेंट, रूम सर्विस, गर्म-ठंडा पानी, टेलिफोन, टीवी, शॉपिंग आरकेड, बैंक्विट हॉल, डॉक्टर ऑन कॉल, लॉन्ड्री, ट्रैवल डेस्क, क्रेडिट कार्ड स्वीकार्य आदि। 

पथिक होटल
लोकेशन- बलरामपुर
दूरभाष- 05263 - 232265
फैक्स- 05263 - 232549
कमरों की संख्या- 29
सुविधाएं- रेस्टोरेंट, ब्यूटी सैलून, शॉपिंग आरकेड, गर्म पानी, रूप सर्विस आदि। 

कैसे जाएं
वायु मार्ग
: यहां का सबसे निकटतम हवाई अड्डा अमुसी एयरपोर्ट, लखनऊ है। गोण्डा से लखनऊ लगभग 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग: भारत के कई प्रमुख शहरों से गोण्डा रेलमार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग: गोण्डा भारत के कई प्रमुख शहरों से सड़कमार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है।

एक नजर में
राज्य
: उत्तर प्रदेश
क्षेत्रफल: 7,352 वर्ग किलोमीटर
भाषा: हिन्दी और अंग्रेजी
एसटीडी कोड: 05262
घूमने का समय: नवम्बर से फरवरी

सरिता पालीवाल