कहां खाएं अमरनाथ जी का रास्ता बडा ही मुश्किलों भरा है। वहां खाने-पीने के ज्यादा विकल्प नहीं है,लेकिन वहां जो लंगर लगाए जाते है वह काफी हद तक खाने की समस्या को हल कर देते हैं। यह लंगर पूरे रास्ते पर लगे होते हैं। यह लंगर खाने के अलावा चिकित्सा, रहने और शौच आदि की सुविधा भी प्रदान करते हैं। शिव सेवक मंडल और समितियों द्वारा पूरे वर्ष जो चंदा इकट्ठा किया जाता है वह पूरा चंदा यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए लगा दिया जाता है। फोटो गैलरी देखें
यहां खाने के नाम पर सिर्फ पराठे, दूध, बिस्कुट, चपाती, दाल-चावल, डोसा, खीर, चाय और ब्रैड ही मिलते हैं। यात्रियों को अपने साथ खाने-पीने की ज्यादा वस्तुएं ले जाने की जरूरत नही है क्योंकि इन लंगरों में लगभग सभी सामान मिल जाता है। इन लंगरों में रात को सब श्रद्धालु एक जगह बैठ जाते हैं और भगवान शिव का गुणगान करते हैं। वहां खाते-पीते हैं और भगवान शिव के नारे लगाते हैं जैसे:- भोले की फौज करगी मौज। दुर्भाग्यवश अमरनाथ जी यात्रा में कुछ कठिनाईयां भी है जैसे:- यह यात्रा केवल दो महीने के लिए की जा सकती है और शिवलिंग का जल्दी पिघल जाना। लंगर भी एक समस्या है। उनसे जुडी मुख्य समस्या यह है कि कितने लंगरों को कितने समय तक अनुमति दी जाए। अधिकारीगण तीर्थयात्रियों को लंगरों में सुरक्षा कारणों से रूकने के लिए मना करते हैं। लंगरों में रूकने के लिए कोई शुल्क नहीं है। जबकि जम्मू-कश्मीर सरकार और तम्बुवालों की तरफ से जो तम्बु दिए जाते है उनके लिए एक रात का किराया 50-100 रू.देना पडता है।
एक नजर में राज्य: जम्मू-कश्मीर लोकेशन: अमरनाथ जी की गुफा समुद्र तल से 12,723 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह अनंनतनाग में सिन्धु घाटी की उतर दिशा की तरफ से हिमालय पर्वत श्रृंखला से और दक्षिण दिशा की तरफ से सशक्त पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है। दूरी: यह जम्मू से 338 किमी. की दूरी पर उत्तर पूर्व में स्थित है, श्रीनगर से 144 किमी. की दूरी पर स्थित है। यात्रा में लगने वाला समय: 2-6 दिन
कैसे पहुंचे श्री नगर से राष्ट्रीय राजमार्ग 1ए द्वारा खनाबल और अवंतीपुरा होते हुए आसानी से अमरनाथ जी पहुंचा जा सकता है। राज्य राजमार्ग द्वारा चंदनवाडी, अनंतनाग और पहलगाम होते हुए भी अमरनाथ जी पहुंचा जा सकता है। इसी राज्य राजमार्ग से बालतल, गंदेरबल और सोनामार्ग होते हुए भी अमरनाथ पहुंचा जा सकता है। जम्मू कश्मीर से राष्ट्रीय राजमार्ग 1ए द्वारा खनाबल, ऊधमपुर और पटनीटॉप होते हुए अमरनाथ जी की पवित्र गुफा तक पहुंचा जा सकता है।
कब जाएं पवित्र शिवलिंग के दर्शन के लिए गुफा को जुलाई मास की अषाढ पूर्णिमा से अगस्त की श्रावण पूर्णिमा तक श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाता है। अमरनाथ की यात्रा रक्षा बंधन को पूरी होती है। अमरनाथ जी के दर्शन के लिए यात्रियों की संख्या प्रतिवर्ष बढ रही है। इसीलिए यात्रा की अवधि को भी बढा दिया गया है। 2004 में इसकी अवधि बढाकर 45 दिन कर दी गई। 2005 में इसकी अवधि को फिर से बढाकर 60 दिन कर दिया गया।
2005 में लगभग 400000 तीर्थयात्रियों ने अमरनाथ यात्रा की। इनमें से लगभग 60 तीर्थयात्रियों की दुर्घटनावश और हृदय संबंधी रोगों के कारण मृत्यु हो गई। इनमें से 11 महिलाएं थी। शुरू में अमरनाथ जी की यात्रा के लिए पहले जम्मू-कश्मीर बैंक की किसी भी शाखा से नामांकन करवाना होता था। नामांकन के बाद ही अमरनाथ जी की यात्रा के लिए अनुमति दी जाती थी। नामांकन करवाने के लिए रक्षा बंधन से दो-तीन महीने पहले अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित किए जाते हैं। यात्रियों को अनुमति प्राप्त करने के लिए अपना स्वास्थ्य प्रमाण पत्र देना होता है। जब से यात्रा की अवधि बढाई गई है तब से यात्रा के नियमों में कुछ छूट दी गई है। यात्री 21 जून से बिना नामांकन के बालतल से अपनी यात्रा शुरू कर सकते हैं। नामांकित यात्रियों के लिए यात्रा औपचारिक रूप से 15 दिन बाद से शुरू होती है।
जो तीर्थयात्री नामांकन करवा कर वहां जाना चाहते है। उनके नामांकन पत्र पर तिथि, रूट और दर्शन का समय अंकित होता है और इसे किसी भी स्थिति में बदला नहीं जाता। यात्रा की घोषणा होने के बाद नामांकन फार्म को जम्मू-कश्मीर बैंक की वेबसाइट से डाउनलोड भी किया जा सकता है। इसकी वेबसाइट है www.jkbank.net। शुरू में तीर्थयात्रियों को किसी भी मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य अधिकारी से स्वास्थ्य प्रमाण पत्र लेना पड़ता था। 2005 में इस नियम में छूट दी गई और स्वयं का का तैयार किया गया स्वास्थ्य प्रमाण पत्र यात्रा के लिए पर्याप्त होता था। यह बात ध्यान देने योग्य है कि अमरनाथ जी की यात्रा मानसरोवर यात्रा की तरह आयोजित नहीं की जाती। मानसरोवर यात्रा में हर व्यक्ति एक समूह का भाग होता है और उसे पूरी यात्रा के दौरान उस समूह में रहना पड़ता है।
यात्री अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी मार्ग चुन सकते हैं। वहां जाने के लिए जे.के.टी.डी.सी. के द्वारा यात्रा पैकेज भी उपलब्ध कराए जाते हैं। यात्री चाहें तो सुविधानुसार इन पैकेजों को भी अपना सकते हैं। अमरनाथ जी की यात्रा के लिए नामांकन करवाना बडा़ ही मुश्किल काम है। क्योंकि प्रतिवर्ष तीर्थयात्रियों की संख्या बढती जा रही है और नामांकन करवाने के लिए बैंक में लंबी कतारें लगी होती है। स्थिति तब और भी खराब हो जाती है जब ट्रैवल एजेंसी और लंगर लगाने वाले अधिकतर परमिटों को अपने साथियों के लिए नामांकित करवा लेते हैं । एक शाखा एक दिन में निश्चित संख्या में परमिट देती है। पिछले साल यात्रा परमिटों में छूट दी गई थी। छूट का फायदा उठाते हुए अधिकतर तीर्थयात्रियों ने बिना परमिट के ही बालतल के रास्ते अपनी यात्रा पूरी की थी।
अमरनाथ जी की पवित्र गुफा तक पहुंचने के लिए दो मुख्य रास्ते हैं।
पहला रास्ता पहलगाम से होकर जाता है पहलगाम के रास्ते अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए पहले चंदनवाडी पहुंचना होता है यह पहलगाम से 16 किमी.दूर है। उसके बाद पिस्सु टॉप जाना होता है जो चंदनवाडी से 3 किमी.दूर है। पिस्सु टॉप से 9 किमी. दूर शेषनाग झील पर पहुंचने के बाद अमरनाथ पहुंचा जा सकता है। शेषनाग झील से अमरनाथ की गुफा केवल 6 किमी. दूर है। पहलगाम के रास्ते यात्रा करने का सबसे बडा़ लाभ यह है कि इस रास्ते पर रात में ठहरने की व्यवस्था है। इस रास्ते पर पहलगाम, शेषनाग, पंचतरणी में रूकने की व्यवस्था है।
बालतल के रास्ते बालतल के रास्ते अमरनाथ जाने के लिए पहले 2 किमी.दूर दोमेल पहुंचना होता है। वहां से 5किमी.दूर बुराडी मार्ग है। बुराडी मार्ग से संगम घाटी जाना होता है 5 किमी. दूर है। संगम घाटी से अमरनाथ की दूरी 3 किमी.है।