dotcom 4pic

 



लातेहार

प्राकृतिक सुन्दरता का पर्याय

प्राकृतिक सुन्दरता का पर्याय लातेहार झारखंड में स्थित है। इसकी स्थापना 4 अप्रैल 2001 ई. को की गई थी। लातेहार मनोहारी जंगलों, खूबसूरत झरनों, विशाल खदानों और हरे-भरे खेतों से भरा पड़ा है। इसके झरनों के पास पिकनिक मनाना पर्यटकों को बहुत पसंद आता है। पर्यटक यहां पिकनिक मनाने के अलावा आदिवासियों की संस्कृतियों से भी रूबरू हो सकते हैं। यह आदिवासी वर्ष में अनेक उत्सव मनाते हैं जिनमें जनी शिकार उत्सव प्रमुख हैं। 

क्या देखें
जनी शिकार उत्सव
: लातेहार का अधिकतर भू-भाग जंगलों से घिरा हुआ है। इन जंगलों में जो आदिवासी रहते हैं उनकी आजीविका इन्हीं जंगलों से चलती हैं। वह इन जंगलों मे पाए जाने वाली केन्दु की पत्तियों और बांस से जो दोने-पत्तल बनाते हैं उन्हीं पर उनकी आय टिकी होती है। यह आदिवासी खाने के लिए वन्य जीवों का शिकार भी करते हैं। शिकार करने के बाद वह जनी शिकार उत्सव मनाते हैं जो इनकी संस्कृति की पहचान है।

कलाकृतियां: लातेहार में उद्योगों की कमी है इसलिए यहां के निवासी आजीविका कमाने के लिए जंगलों में पाए जाने वाले फूल-पत्तों से खूबसूरत कलाकृतियां बनाते हैं। इन कलाकृतियों में बांस की टोकरियां प्रमुख हैं जो पर्यटकों को बहुत पसंद आती हैं। टोकरियों के अलावा वह महुआ के फूलों और केंदु के पत्तियों से भी अनेक कलाकृतियां बनाते हैं। यहां आने वाले अधिकतर पर्यटक इन कलाकृतियों को स्मृतिकाओं के रूप में अपने साथ ले जाते हैं।

खदानें: लातेहार को इसकी कोयले, बॉक्साइट, लेटेराइट और डोलोमाईट की खदानों के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। यह खदानें आकार में बहुत बड़ी हैं और लातेहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। पर्यटक चाहें तो इन खदानों को देखने जा सकते हैं। इन खदानों में अनेक मजदूर काम करते हैं। इन खदानों को देखने के बाद चियांकी, कोयल व्यू प्वाइंट और मैगनोलिया प्वांइट घूमने जाया जा सकता है। यह तीनों बहुत खूबसूरत है और लातेहार के पर्यटन उद्योग की जान माने जाते हैं।

झरने: प्रकृति ने लातेहार में अपने सौंदर्य को खुलकर बिखेरा है और झरनों के रूप में इसको अनमोल उपहार दिए हैं। यह सभी झरने बहुत खूबसूरत हैं और पर्यटकों को बहुत पसंद आते हैं। झरनों के पास शहर की भागती-दौड़ती जिंदगी से दूर जीवन के कुछ यादगार लम्हें बिताए जा सकते हैं। यह सभी झरने इतने खूबसूरत हैं कि जो भी पर्यटक यहां आते हैं वह इनकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाते। कांती, निचला घागरी, शाही, लोढ़, मिरचिया और ऊपरी घागरी इसके प्रमुख झरने हैं।

कहां ठहरें: लातेहार में पर्यटकों के ठहरने और खाने-पीने के लिए कोई खास विकल्प नहीं हैं। अत: उन्हें आस-पास के क्षेत्रों में रूकना पड़ता है। लातेहार के पास बोकारो में पर्यटक बिना किसी परेशानी के रूक सकते हैं।

बोकारो होटल
लोकेशन
: बोकारो
टेलीफोन: 240873

होटल ब्लू डायमण्ड
लोकेशन
: नया मोड, बोकारो
टेलीफोन: 240299 / 240277 / 240155

होटल क्लासिक
लोकेशन
: सेक्टर 4, सिटी सेन्टर
टेलीफोन: 242216 / 242448

होटल हंस रिजेन्सी
लोकेशन: सेक्टर 1, राम मन्दिर के पास
टेलीफोन: 240896 / 240899   

कैसे जाएं
वायु मार्ग
: राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय हवाई सेवाओं द्वारा रांची हवाई अड्डे तक पहुंचा जा सकता है। यहां से लातेहार तक पहुंचना काफी आसान है।

रेल मार्ग: लातेहार में गढ़वा-रांची लाईन पर तोरी रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया है। पलामु एक्सप्रेस, हटिया-दिल्ली एक्सप्रेस, स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस और शक्तिपुंज एक्सप्रेस से तोरी रेलवे स्टेशन तक पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग: झारखंड की राजधानी रांची से लातेहार के लिए नियमित बस सेवा है।    

लातेहार: एक नजर में
राज्य
: झारखंड
क्षेत्रफल: 3671.59 वर्ग कि.मी.
जनसंख्या: 5,58,831
खण्ड: 7
गांव: 773
ग्लोब पर स्थिति: 23 डिग्री 44 इंच उत्तरी अक्षांश और 84 डिग्री 31 इंच पूर्वी देशांतर पर स्थित है।

ऋतुराज पांचाल