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सवाई माधोपुर

खूबसूरत वास्तुशिल्प से सजे मंदिर

रणथंभोर राष्ट्रीय उद्यान के लिए प्रसिद्ध सवाई माधोपुर राजस्थान का प्रमुख शहर है। इस शहर की स्थापना सवाई माधो सिंह प्रथम ने की थी जो जयपुर के महाराजा थे। 18वीं शताब्दी में महाराजा सवाई माधोपुर द्वारा इस शहर की स्थापना करने के बाद उन्हीं के नाम पर इस जगह का नाम सवाई माधोपुर पड़ा। यह स्थान केवल राष्ट्रीय उद्यान के लिए ही नहीं बल्कि अपने मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। हर मंदिर के साथ कोई-न-कोई कहानी जुड़ी हुई है। खूबसूरत वास्तुशिल्प से सजे ये मंदिर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचते हैं। कुल मिला कहा जाए तो सवाई माधोपुर एक उपयुक्त पर्यटक स्थल है।

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रणथंभौर किला

सवाई माधोपुर का इतिहास रणथंभौर किले के आस-पास घूमता है। विंध्य और अरावली से घिर रणथंभौर किले के बारे में अभी तक सही-सही पता नहीं चल पाया है कि इसका निर्माण कब हुआ था। इस किले की ताकत और दुर्गम रास्ता इसे शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करता था, विशेष रूप से दिल्ली और आगरा के शासक यहां पहुंचने में असमर्थ लगते थे। किले के प्रमुख शासक राव हमीर थे जिन्होंने 1296 के आसपास यहां शासन किया। किले का सुंदर वास्तुशिल्प, तालाब और झील इसके निर्माण के कला प्रेम और ज्ञान को दर्शाते हैं। किले का प्रत्येक हिस्सा भारतीय संस्कृति और दर्शन का प्रतीक है। किले के अंदर ऐतिहासिक महत्व के अनेक स्थान हैं जसे तोरण द्वार, महादेव छत्री, सामतों की हवेली, 32 खंबों वाली छतरी, मस्जिद और गणेश मंदिर।

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान सवाई माधोपुर का प्रमुख पर्यटक स्थल है। यह उद्यान देश के बेहतरीन बाघ आरक्षित क्षेत्रों में से एक है। 1981 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला। 392 वर्ग किमी. में फैला यह उद्यान अरावली और विंध्य की पहाड़ियों में फैला है। यहां स्थित तीन झीलों के पास इन बाघों के दिखाई देने की अधिक संभावना रहती है। बाघ के अलावा यहां चीते भी रहते हैं। यह चीते उद्यान के बाहरी हिस्से में अधिक पाए जाते हैं। इन्हें देखने के लिए कचीदा घाटी सबसे उपयुक्त जगह है। बाघ और चीतों के अलावा सांभर, चीतल, जंगली सूअर, चिंकारा, हिरन, सियार, तेंदुए, जंगली बिल्ली और लोमड़ी भी पाई जाती है। जानवरों के अलावा पक्षियों की लगभग 264 प्रजातियां यहां देखी जा सकती हैं। सर्दियों में अनेक प्रवासी पक्षी यहां आते हैं। यहां जीप सफारी का भी आनंद उठाया जा सकता है।

रणथंभोर गणेश मंदिर
गणेश मंदिर सवाई माधोपुर का प्रमुख आकर्षण है। देश के हर हिस्से से हजारों लोग सुख समृद्धि के इस देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं। मंदिर का मुख्य आकर्षण भगवान गणेश को मिलने वाले शादी के निमंत्रण हैं। भद्रपद सुदी चतुर्थी को यहां मेले का आयोजन किया जाता है।

अमरश्‍वर महादेव मंदिर
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के रास्ते में खूबसूरत पहाड़ियों के बीच पवित्र अमरश्‍वर महादेव मंदिर स्थ्ति है। यह स्थान सवाई माधोपुर का प्रमुख पिकनिक स्पॉट भी है।

रामेश्‍वरम धाम
सवाई माधोपुर से 60 किमी. दूर बनास और चंबल नदियों के संगम पर रामेश्‍वरम स्थित है। यहां पर एक सुंदर शिव मंदिर है। मंदिर में हर साल शिव रात्रि के दिन मेला आयोजित किया जाता है।

चमत्कार मंदिर
चमत्कार मंदिर सवाई माधोपुर शहर में रेलवे स्टेशन मुख्य मार्ग पर स्थित है। यह मंदिर अनेक चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। हर साल शरद पूर्णिमा के दिन यहां मेला लगता है।

काला-गोरा भैरव मंदिर
शहर के पूर्वी ओर आकाश की ऊंचाइयों को छूता भैरव का तांत्रिक स्‍थल है। इसके द्वार पर सूंड उठाकर खड़े हुए हाथी बने हुए हैं। मंदिर का मुख्य आकर्षण काला-गोरा भैरव है जो तामसी और राजसी शैली में देखा जा सकता है।

खंदर किला
मध्यकाल में बना तारागढ़ का खंदर किला सवाई माधोपुर से 40 किमी. दूर है। इस किले के निर्माण को लेकर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना तय है कि 12वीं शताब्दी में यह किला अपनी उन्नति के चरम पर था। इस किले का निर्माण प्राचीन भारतीय वास्तुशैली में किया गया है। इसकी भौगोलिक स्थित कुछ ऐसी है कि दुश्मन के लिए इस पर आक्रमण करना कठिन होता था। इसलिए इस किले को अजेय किला भी कहा जाता था।

कैसे जाएं
वायु मार्ग
: नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर है।
रेल मार्ग: सवाई माधोपुर में रेलवे स्टेशन है जो राजस्थान के अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग: राष्ट्रीय राजमार्ग 11 और 12 के रास्ते सवाई माधोपुर पहुंचा जा सकता है।

सवाई माधोपुर- एक नजर में
राज्य: राजस्थान
भाषा: राजस्थानी, हिंदी, अंग्रेजी
कब जाएं: अक्टूबर से जून

उमा मिश्रा